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5 डीआरएस चरणों की तुलना: फैसला साफ
विशेष विश्लेषण

5 डीआरएस चरणों की तुलना: फैसला साफ

क्रिकेट में डीआरएस यानी निर्णय समीक्षा प्रणाली मैदानी अंपायर के फैसले की तकनीकी जांच करती है और गलत निर्णयों को सुधारने का अवसर देती है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के नियमों के तहत भारत, ऑस्ट्रेलिया,...

16 अक्टूबर 2026 5 min read
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5 डीआरएस चरणों की तुलना: फैसला साफ

क्रिकेट में डीआरएस यानी निर्णय समीक्षा प्रणाली मैदानी अंपायर के फैसले की तकनीकी जांच करती है और गलत निर्णयों को सुधारने का अवसर देती है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के नियमों के तहत भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और अन्य क्रिकेट खेलने वाले देशों में इसका उपयोग टेस्ट, एकदिवसीय और टी20 मुकाबलों में किया जाता है। सामान्यतः खिलाड़ी को रिव्यू मांगने के लिए लगभग 15 सेकंड मिलते हैं, जबकि हर टीम को प्रारूप और प्रतियोगिता के अनुसार प्रति पारी सीमित रिव्यू मिलते हैं। तीसरा अंपायर हॉक-आई गेंद ट्रैकिंग, अल्ट्राएज और कभी-कभी हॉटस्पॉट से गेंद, बल्ले, पैड और स्टंप का विश्लेषण करता है। एल्बीडब्ल्यू में पिचिंग, इम्पैक्ट और विकेट तीन निर्णायक बिंदु होते हैं; करीबी स्थिति में मैदानी फैसला “अंपायर कॉल” के कारण कायम रह सकता है। अगली बार रिव्यू देखते समय पहले निर्णय, फिर उपलब्ध तकनीकी प्रमाण और अंत में रिव्यू बचने की स्थिति पर ध्यान दें।

बड़े क्रिकेट स्टेडियम में मैदानी अंपायर दोनों हाथों से टी संकेत देकर डीआरएस मांगता हुआ

डीआरएस का असली उद्देश्य खेल को रोबोटिक बनाना नहीं, बल्कि साफ गलती को पकड़ना है। गेंद की गति, उछाल, बल्ले का किनारा और स्टंप की दिशा—इन सबको एक साथ देखकर तीसरा अंपायर निर्णय तक पहुंचता है। फिर भी तकनीक अंतिम सत्य नहीं होती; उसके इस्तेमाल के नियम, उपलब्ध कैमरे और प्रसारण सुविधा भी परिणाम को प्रभावित करते हैं। क्रिकेट प्रेमी पर इस विषय को समझने का सबसे व्यावहारिक तरीका यही है कि हर रिव्यू को केवल “आउट” या “नॉट आउट” के चश्मे से न देखें, बल्कि प्रक्रिया के पांच चरणों में बांटकर समझें। क्रिकेट के अंपायर संकेतों की पूरी जानकारी

डीआरएस का इतिहास और मौजूदा नियम प्रतियोगिता के अनुसार बदल सकते हैं, इसलिए आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के खेल नियम को अंतिम संदर्भ मानना चाहिए। अब वह क्रम देखते हैं जिसमें एक तनावपूर्ण अपील तकनीकी निर्णय में बदलती है।

चरण 1: क्या सही रिव्यू संकेत देना जरूरी है?

हां, रिव्यू की शुरुआत खिलाड़ी या कप्तान के समय पर दिए गए टी संकेत से होती है; सामान्य सीमा लगभग 15 सेकंड है। बल्लेबाज आउट दिए जाने के बाद समीक्षा मांग सकता है, जबकि फील्डिंग कप्तान तब रिव्यू लेता है जब मैदानी अंपायर ने आउट नहीं दिया हो। संकेत देर से दिया गया, गलत व्यक्ति ने मांग की या चर्चा के बाद अनावश्यक विलंब हुआ, तो रिव्यू अस्वीकार किया जा सकता है।

पहला चरण देखने में छोटा लगता है, लेकिन यहीं कई रणनीतिक भूलें होती हैं। निर्णय लेने के लिए विकेटकीपर, गेंदबाज और निकटतम फील्डर से संकेत मिल सकते हैं; फिर कप्तान को यह तय करना पड़ता है कि अपील में पर्याप्त भरोसा है या केवल शोर। टी20 में 15 सेकंड बहुत लंबा समय नहीं होता, जबकि टेस्ट क्रिकेट में गेंदबाजों के पास कभी-कभी अधिक शांत विचार का अवसर दिखता है, फिर भी निर्धारित समय वही निर्णायक रहता है। डीआरएस केवल भावनात्मक अपील का विस्तार नहीं है।

  • बल्लेबाज के आउट होने पर बल्लेबाज समीक्षा मांगता है।
  • नॉट आउट निर्णय को चुनौती देने के लिए फील्डिंग कप्तान संकेत देता है।
  • कप्तान को समय सीमा समाप्त होने से पहले दोनों हाथों से टी बनाना होता है।
  • समीक्षा प्रक्रिया में मैदानी अंपायर तीसरे अंपायर को निर्णय और समीक्षा का प्रकार बताता है।

यहां एक बारीक बात सुनिए—यही वह हिस्सा है जो मायने रखता है: रिव्यू लेना और रिव्यू सही होना दो अलग बातें हैं। यदि गेंद बल्ले से साफ लगी है, तो अल्ट्राएज मदद करेगा; लेकिन यदि मामला एल्बीडब्ल्यू का है, तो केवल आवाज सुनकर निर्णय नहीं लिया जा सकता। Source: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की खेल शर्तों में मूल निर्णय कायम रहने का सिद्धांत कई करीबी मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

आगे बढ़ने से पहले इस प्रक्रिया को दृश्य रूप में समझना उपयोगी है।

जानना चाहते हैं कि निर्णय यात्रा कैसे आगे बढ़ती है? नीचे दिए गए मार्ग से संबंधित जानकारी देखें।

और जानें

चरण 2: तीसरा अंपायर कौन-से प्रमाण देखता है?

तीसरा अंपायर पहले मैदानी अंपायर का निर्णय और समीक्षा का प्रश्न देखता है, फिर उपलब्ध वीडियो, ध्वनि और गेंद-पथ प्रमाण की जांच करता है। समीक्षा में आम तौर पर रीप्ले, अल्ट्राएज या स्निकोमीटर, हॉक-आई गेंद ट्रैकिंग और कुछ प्रसारणों में हॉटस्पॉट शामिल होते हैं। प्रमाण निर्णायक न हो, तो मूल निर्णय बनाए रखने का नियम लागू हो सकता है।

तीसरा अंपायर अंधेरे कमरे में अकेला फैसला नहीं करता; उसके सामने अलग-अलग कैमरा कोण, धीमी गति के रीप्ले और प्रसारण तकनीशियनों की सहायता होती है। अल्ट्राएज गेंद और बल्ले के पास से गुजरने के समय ध्वनि में अचानक बदलाव दिखाता है। हॉटस्पॉट इन्फ्रारेड संकेतों से टकराव का निशान खोजता है, लेकिन हर मैदान या हर प्रतियोगिता में यह सुविधा उपलब्ध हो, यह जरूरी नहीं। इसीलिए टीवी पर दिखने वाला ग्राफिक और आधिकारिक निर्णय-संकेत हमेशा एक ही चीज नहीं होते।

हॉक-आई गेंद के संभावित रास्ते का त्रि-आयामी अनुमान बनाता है। इसके लिए कैमरा कैलिब्रेशन, गेंद की शुरुआती गति, रिलीज बिंदु और पिच पर उसके व्यवहार जैसी जानकारी उपयोगी होती है। एक महत्वपूर्ण, अक्सर छूट जाने वाला तथ्य यह है कि गेंद ट्रैकिंग “गेंद निश्चित रूप से ऐसे ही जाती” नहीं कहती; वह उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर संभावित पथ दिखाती है। यही कारण है कि एल्बीडब्ल्यू में प्रभाव क्षेत्र और स्टंप पर लगने की सीमा को लेकर अंपायर कॉल बनी रहती है।

तीसरे अंपायर की सामान्य जांच इस तरह आगे बढ़ती है:

  1. क्या गेंद वैध डिलीवरी थी?
  2. क्या बल्लेबाज ने गेंद को पहले बल्ले से खेला?
  3. क्या गेंद पैड या शरीर से निर्धारित नियमों के अनुसार टकराई?
  4. क्या गेंद स्टंप से टकराती?
  5. क्या उपलब्ध प्रमाण मैदानी निर्णय बदलने के लिए पर्याप्त है?

तीसरे अंपायर के कक्ष में कई मॉनिटरों पर हॉक-आई और अल्ट्राएज रीप्ले दिखाई देते हुए

यहां तकनीकी शब्दों को याद रखने से अधिक जरूरी है उनका काम समझना। अल्ट्राएज किनारा पकड़ता है, हॉक-आई रास्ता दिखाता है, और हॉटस्पॉट संपर्क का संभावित निशान दिखाता है। तीनों तकनीकें एक-दूसरे की जगह नहीं लेतीं। एल्बीडब्ल्यू नियम आसान भाषा में

चरण 3: एल्बीडब्ल्यू में डीआरएस कैसे फैसला करता है?

एल्बीडब्ल्यू समीक्षा में तीन मुख्य प्रश्न पूछे जाते हैं: गेंद कहां पिच हुई, पैड पर कहां लगी और गेंद स्टंप पर लगती या नहीं। इन्हें सामान्यतः पिचिंग, इम्पैक्ट और विकेट कहा जाता है। हॉक-आई इन बिंदुओं का अनुमान लगाता है, लेकिन यदि परिणाम सीमा-रेखा के बहुत करीब हो, तो अंपायर कॉल के कारण मैदानी अंपायर का फैसला कायम रहता है।

एल्बीडब्ल्यू का नियम केवल “पैड पर लगी गेंद” नहीं है। गेंद का पिचिंग क्षेत्र, बल्लेबाज का शरीर के सामने होना, शॉट खेलने का प्रयास, इम्पैक्ट स्थान और स्टंप की दिशा—इन सभी को नियमों के साथ पढ़ना पड़ता है। यदि गेंद लेग स्टंप के बाहर पिच हुई है, तो सामान्य स्थिति में एल्बीडब्ल्यू नहीं दिया जाता; लेकिन बल्लेबाज ने शॉट खेलने का प्रयास किया या नहीं, जैसे नियमगत तथ्य भी भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए टीवी स्क्रीन पर तीन रंगों वाला ग्राफिक देखकर तुरंत निष्कर्ष निकालना जोखिम भरा है।

अंपायर कॉल को लेकर दर्शकों में सबसे अधिक भ्रम होता है। यदि मैदानी अंपायर नॉट आउट दे और हॉक-आई दिखाए कि गेंद स्टंप के बहुत छोटे हिस्से से टकरा सकती थी, पर परिणाम निर्धारित सीमा में हो, तो नॉट आउट कायम रह सकता है और टीम का रिव्यू सामान्यतः बचा रहता है। यदि मैदानी अंपायर ने आउट दिया और वही करीबी सीमा दिखाई देती है, तो आउट कायम रहेगा। यह किसी टीम को अतिरिक्त लाभ देना नहीं, बल्कि तकनीकी अनिश्चितता की स्थिति में मूल निर्णय का सम्मान करना है।

“मूल निर्णय कायम रहेगा”—यह सिद्धांत आईसीसी खेल शर्तों में करीबी समीक्षा के अर्थ को समझने की कुंजी है। इसे याद रखने के लिए तीन चरणों की यह सूची उपयोगी है:

  • पिचिंग: गेंद ने जमीन पर कहां टप्पा खाया?
  • इम्पैक्ट: गेंद पैड से किस स्थान पर टकराई?
  • विकेट: गेंद का अनुमानित रास्ता स्टंप को छूता या गिराता?
  • अंपायर कॉल: सीमा-रेखा वाले परिणाम में मैदानी निर्णय कायम रहता है।

यहां एक विरोधाभासी लेकिन व्यावहारिक निष्कर्ष है: कभी-कभी “सही” तकनीकी संकेत मिलने के बाद भी निर्णय नहीं बदलता, क्योंकि डीआरएस का लक्ष्य हर संदेह को पलटना नहीं, बल्कि स्पष्ट गलती को सुधारना है। Source: मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के नियम में एल्बीडब्ल्यू से संबंधित नियमों को पढ़ने पर यह अंतर और स्पष्ट हो जाता है।

चरण 4: अल्ट्राएज, हॉटस्पॉट और हॉक-आई में क्या अंतर है?

अल्ट्राएज गेंद और बल्ले के संपर्क से पैदा होने वाली ध्वनि-तरंग में बदलाव खोजता है, हॉटस्पॉट संपर्क से बने इन्फ्रारेड निशान पर निर्भर करता है और हॉक-आई गेंद का संभावित रास्ता दिखाता है। इसलिए अल्ट्राएज किनारे के लिए, हॉक-आई एल्बीडब्ल्यू के लिए और हॉटस्पॉट संपर्क की पुष्टि के लिए अधिक उपयोगी होता है। कोई एक तकनीक हर समीक्षा का उत्तर नहीं देती।

अल्ट्राएज में समय-सामंजस्य सबसे महत्वपूर्ण है। यदि आवाज का उछाल गेंद के बल्ले के पास से गुजरने के ठीक क्षण पर आए, तो किनारे की संभावना बढ़ सकती है; लेकिन स्टेडियम का शोर, बल्ले का जमीन से टकराना या पैड की आवाज भी जांच को जटिल बना सकती है। इसीलिए तीसरा अंपायर ध्वनि ग्राफ को अकेले नहीं पढ़ता, बल्कि वीडियो के साथ मिलाता है। धीमी गति का रीप्ले यहां निर्णायक संदर्भ देता है, न कि केवल सुंदर दिखने वाली लहरदार रेखा।

हॉटस्पॉट हर प्रसारण पैकेज का अनिवार्य भाग नहीं है। कैमरा व्यवस्था, तकनीकी साझेदार, मौसम, रोशनी और प्रतियोगिता की खेल शर्तें इसकी उपलब्धता प्रभावित कर सकती हैं। दूसरी ओर हॉक-आई का परिणाम कैमरों की स्थिति और कैलिब्रेशन पर निर्भर होता है। यही वह सूचना है जिसे सामान्य लेख अक्सर छोड़ देते हैं: डीआरएस का अनुभव केवल नियमों से नहीं, आयोजन स्थल की प्रसारण संरचना से भी बनता है।

तकनीक मुख्य काम सामान्य उपयोग
अल्ट्राएज ध्वनि में सूक्ष्म बदलाव पहचानना बल्ले का किनारा
हॉटस्पॉट संपर्क का तापीय निशान दिखाना बल्ले या पैड से टकराव
हॉक-आई गेंद का संभावित रास्ता बनाना एल्बीडब्ल्यू और स्टंप
धीमी गति रीप्ले घटनाक्रम का दृश्य संदर्भ देना सभी समीक्षा

मैदानी दर्शक के लिए सबसे अच्छा तरीका यह है कि वह तकनीक के नाम से प्रभावित होने के बजाय प्रश्न पूछे: यह प्रमाण किस दावे की जांच कर रहा है? अल्ट्राएज यह नहीं बता सकता कि गेंद स्टंप पर लगती; हॉक-आई यह नहीं बता सकता कि बल्ले का किनारा था, जब तक संपर्क का इनपुट स्पष्ट न हो। क्रिकेट में गेंद ट्रैकिंग और प्रसारण तकनीक

अब रिव्यू की संख्या और उसके बचने-खत्म होने वाले हिस्से पर आएं—यहीं कप्तानी का गणित शुरू होता है।

चरण 5: रिव्यू की पुष्टि कैसे होती है?

रिव्यू की पुष्टि तब होती है जब तीसरा अंपायर सभी उपलब्ध प्रमाण देखने के बाद निर्णय सुनाता है और मैदानी अंपायर उसे मैदान पर संप्रेषित करता है। सफल समीक्षा में निर्णय बदल सकता है; असफल समीक्षा में टीम का अवसर घट सकता है। अंपायर कॉल का प्रभाव प्रतियोगिता की लागू खेल शर्तों पर निर्भर करता है, इसलिए हर टूर्नामेंट में रिव्यू की संख्या और बचने के नियम पहले देखना चाहिए।

कई अंतरराष्ट्रीय प्रारूपों में टीमों को एक पारी में दो या तीन समीक्षा अवसर मिलते हैं, लेकिन यह संख्या टेस्ट, एकदिवसीय, टी20, घरेलू प्रतियोगिता और आयोजन के नियमों के अनुसार बदल सकती है। कुछ परिस्थितियों में सफल समीक्षा या अंपायर कॉल के बाद अवसर बचा रहता है, जबकि स्पष्ट रूप से असफल समीक्षा घट जाती है। नियमों में बदलाव होने पर पुराने आंकड़े तुरंत भरोसेमंद नहीं रहते—2026 में भी किसी सीरीज की आधिकारिक खेल शर्तें अंतिम संदर्भ हैं।

कप्तान के लिए यह केवल तकनीक नहीं, जोखिम प्रबंधन है। उदाहरण के लिए, पारी के शुरुआती ओवर में मामूली किनारे पर समीक्षा खर्च करने से बाद में स्पष्ट एल्बीडब्ल्यू पर टीम असहाय हो सकती है। दूसरी ओर, मैच के अंतिम ओवर में बचा हुआ रिव्यू बेकार भी रह सकता है। इसलिए निर्णय लेने से पहले इन चार संकेतों को तौला जाता है:

  • गेंदबाज और विकेटकीपर का भरोसा कितना मजबूत है?
  • अपील का केंद्र बल्ला है, पैड है या कैच?
  • उपलब्ध रिव्यू कितने बचे हैं?
  • मैच का चरण और विकेट का महत्व क्या है?

एक उपयोगी संचालन-टिप यह है कि टीमों को अभ्यास में अलग-अलग आवाज संकेत और रीप्ले पैटर्न पर निर्णय लेना चाहिए, क्योंकि मैदान का शोर कप्तान तक सूचना पहुंचने में विलंब कर सकता है। यह कोई आधिकारिक संख्या नहीं, बल्कि रणनीतिक व्यवस्था का प्रश्न है; आधिकारिक नियम फिर भी 15 सेकंड की मांग-सीमा और प्रतियोगिता की समीक्षा-सीमा तय करते हैं। क्रिकेट प्रेमी के पाठकों के लिए यही बड़ा सबक है: अच्छा रिव्यू ज्ञान तकनीक समझने से शुरू होता है, पर सही चयन पर समाप्त होता है।

इस निर्णायक हिस्से पर और उदाहरण देखना चाहते हैं? संबंधित मार्गदर्शिका यहां उपलब्ध है।

विस्तार से समझें

सामान्य डीआरएस विफलताओं का समाधान

डीआरएस की सामान्य विफलता तकनीक खराब होने से अधिकतर गलत अपेक्षा, अधूरी जानकारी या नियमों की गलत समझ से पैदा होती है। यदि आवाज दिखाई नहीं देती, तो इसका अर्थ अपने-आप “कोई किनारा नहीं” नहीं होता; यदि हॉक-आई तीन स्टंप दिखाता है, तो इसका अर्थ यह नहीं कि हर स्थिति में मैदानी फैसला बदलेगा। पहले समीक्षा का प्रकार पहचानें, फिर उसी के लिए प्रासंगिक प्रमाण देखें।

मैच देखते हुए इन समस्याओं को इस तरह समझें:

  1. अल्ट्राएज में आवाज देर से दिखे: वीडियो समय और ध्वनि संकेत का मिलान करें; जमीन या पैड की आवाज भी हो सकती है।
  2. हॉक-आई पर गेंद स्टंप छूती दिखे: पिचिंग, इम्पैक्ट और अंपायर कॉल तीनों को साथ पढ़ें।
  3. हॉटस्पॉट उपलब्ध न हो: प्रतियोगिता की तकनीकी व्यवस्था और प्रसारण पैकेज जांचें।
  4. रिव्यू का फैसला देर से आए: तीसरे अंपायर को कई कैमरा कोण और नियमगत प्रश्न जांचने पड़ सकते हैं।
  5. रिव्यू बचा या नहीं समझ न आए: आधिकारिक स्कोरबोर्ड, प्रसारण ग्राफिक या मैच की खेल शर्त देखें।

कभी-कभी तकनीकी विफलता सचमुच संभव होती है—कैमरा संकेत टूटना, ट्रैकिंग कैलिब्रेशन में समस्या या बिजली और नेटवर्क संबंधी बाधा इसका उदाहरण हैं। ऐसे मामलों में प्रतियोगिता के नियम वैकल्पिक प्रक्रिया बताते हैं; मैदानी अंपायर का निर्णय अक्सर आधार बना रहता है। दर्शक को सोशल मीडिया पर कटे हुए वीडियो के बजाय पूरा रीप्ले और आधिकारिक घोषणा देखनी चाहिए, क्योंकि कुछ सेकंड हट जाने से निर्णय का संदर्भ बदल जाता है। क्रिकेट मैच में अंपायर निर्णय समझने की मार्गदर्शिका

सबसे कठिन भ्रम “निश्चित” और “संभावित” के बीच है। गेंद ट्रैकिंग संभावित प्रक्षेपवक्र देती है, जबकि अल्ट्राएज संपर्क की संभावना बढ़ाता है; दोनों प्रमाणों को नियमों की सीमा के भीतर पढ़ना पड़ता है। सुनिए—यही वह हिस्सा है जो मायने रखता है: डीआरएस गलती-मुक्त क्रिकेट का वादा नहीं करता, बल्कि स्पष्ट गलती को कम करने की नियंत्रित प्रणाली है।

रात के क्रिकेट मैच में विशाल स्क्रीन पर एल्बीडब्ल्यू समीक्षा का तीन चरणों वाला ग्राफिक

निर्णय समझने के लिए यह संक्षिप्त सूत्र याद रखें: सही संकेत, सही समीक्षा प्रकार, सही तकनीकी प्रमाण, फिर खेल शर्तों के अनुसार अंतिम निर्णय। यही क्रम भावनात्मक बहस को नियम-आधारित समझ में बदलता है।

अगर आप मैच देखते समय हर समीक्षा का अर्थ जल्दी पकड़ना चाहते हैं, तो इस सारांश को सुरक्षित रखें।

मुख्य बातें देखें

डीआरएस का संक्षिप्त निष्कर्ष

क्रिकेट में डीआरएस पांच जुड़े चरणों की प्रक्रिया है: समय पर टी संकेत, समीक्षा प्रश्न की पहचान, उपयुक्त तकनीकी प्रमाण, एल्बीडब्ल्यू में तीन जांच और खेल शर्तों के अनुसार अंतिम फैसला। यह अंपायर को हटाता नहीं, बल्कि निर्णय के कठिन क्षण में अतिरिक्त प्रमाण उपलब्ध कराता है। अल्ट्राएज, हॉटस्पॉट और हॉक-आई की भूमिकाएं अलग हैं; इन्हें एक ही “रीप्ले तकनीक” समझना गलत है। अंपायर कॉल का अर्थ भी असफल तकनीक नहीं, बल्कि सीमा-रेखा वाले परिणाम में मूल निर्णय का कायम रहना है। 2026 में किसी विशेष मैच, आईपीएल मुकाबले या अंतरराष्ट्रीय सीरीज को समझते समय उस आयोजन की आधिकारिक समीक्षा संख्या, समय सीमा और तकनीकी सुविधा अवश्य देखें। अगली बार कप्तान टी संकेत दे, तो पहले यह पूछें—किस दावे की जांच हो रही है, कौन-सा प्रमाण उपलब्ध है और रिव्यू बचने की स्थिति क्या है? यही तीन सवाल डीआरएस को सचमुच समझने की कुंजी हैं।

क्या इस विषय पर अपनी क्रिकेट समझ और मजबूत करनी है? क्रिकेट प्रेमी की संबंधित सामग्री देखें।

और जानकारी पढ़ें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: क्रिकेट में डीआरएस क्या है?

उत्तर: डीआरएस मैदानी अंपायर के फैसले की तकनीकी समीक्षा करने वाली निर्णय प्रणाली है। इसमें तीसरा अंपायर वीडियो रीप्ले, अल्ट्राएज, हॉक-आई और उपलब्ध होने पर हॉटस्पॉट का उपयोग करता है। बल्लेबाजी टीम और फील्डिंग टीम निर्धारित परिस्थितियों में समीक्षा मांग सकती हैं। इसका उद्देश्य हर निर्णय पलटना नहीं, बल्कि स्पष्ट गलती की संभावना घटाना है।

प्रश्न: डीआरएस कैसे लिया जाता है?

उत्तर: समीक्षा लेने के लिए बल्लेबाज या फील्डिंग कप्तान को सामान्यतः लगभग 15 सेकंड के भीतर दोनों हाथों से टी संकेत देना होता है। बल्लेबाज आउट दिए जाने पर समीक्षा मांगता है, जबकि कप्तान नॉट आउट निर्णय को चुनौती दे सकता है। समय निकलने, गलत प्रक्रिया या अनुचित मांग की स्थिति में समीक्षा स्वीकार नहीं की जा सकती।

प्रश्न: डीआरएस और अंपायर कॉल में क्या अंतर है?

उत्तर: डीआरएस तकनीकी समीक्षा की पूरी प्रणाली है, जबकि अंपायर कॉल करीबी परिणाम में मूल मैदानी निर्णय बनाए रखने का नियम है। एल्बीडब्ल्यू में पिचिंग, इम्पैक्ट और विकेट के अनुमानित परिणाम सीमा के पास हों, तो आउट या नॉट आउट निर्णय कायम रह सकता है। समीक्षा का परिणाम बदलना और समीक्षा का अवसर बचना प्रतियोगिता की खेल शर्तों पर निर्भर करता है।

प्रश्न: एल्बीडब्ल्यू डीआरएस में कौन-से तीन चरण देखे जाते हैं?

उत्तर: एल्बीडब्ल्यू समीक्षा में पिचिंग, इम्पैक्ट और विकेट तीन मुख्य चरण देखे जाते हैं। पहले गेंद के टप्पे की जगह, फिर पैड पर टकराने का स्थान और अंत में स्टंप तक गेंद का संभावित रास्ता जांचा जाता है। इसके साथ गेंद का बल्ले से पहले लगना, शॉट खेलने का प्रयास और नियमगत स्थिति भी देखी जा सकती है।

प्रश्न: डीआरएस में हॉक-आई और अल्ट्राएज का क्या काम है?

उत्तर: हॉक-आई गेंद का संभावित रास्ता दिखाता है, जबकि अल्ट्राएज गेंद और बल्ले के संपर्क से जुड़ा ध्वनि संकेत खोजता है। हॉक-आई का उपयोग विशेष रूप से एल्बीडब्ल्यू में और अल्ट्राएज का उपयोग किनारा जांचने में होता है। हॉटस्पॉट उपलब्ध होने पर संपर्क का तापीय निशान दिखा सकता है, लेकिन यह हर मैच में अनिवार्य रूप से उपलब्ध नहीं होता।

प्रश्न: हर टीम को कितने डीआरएस रिव्यू मिलते हैं?

उत्तर: हर टीम को मिलने वाले रिव्यू की संख्या प्रारूप और प्रतियोगिता के नियमों पर निर्भर करती है, इसलिए सामान्यतः दो या तीन की सीमा देखने को मिलती है। टेस्ट, एकदिवसीय, टी20 और घरेलू टूर्नामेंट में अलग खेल शर्तें लागू हो सकती हैं। सफल समीक्षा या अंपायर कॉल के बाद अवसर बचने का नियम भी संबंधित प्रतियोगिता की आधिकारिक शर्तों से जांचना चाहिए।

प्रश्न: डीआरएस काम न करे या तकनीकी प्रमाण स्पष्ट न हो तो क्या होता है?

उत्तर: तकनीकी प्रमाण उपलब्ध न होने या स्पष्ट न होने पर मैदानी अंपायर का मूल निर्णय अक्सर आधार बना रहता है। कैमरा संकेत, ट्रैकिंग, ध्वनि या हॉटस्पॉट में समस्या होने पर तीसरा अंपायर लागू खेल शर्तों के अनुसार वैकल्पिक प्रक्रिया अपनाता है। दर्शकों को कटे हुए सोशल मीडिया वीडियो के बजाय पूरा रीप्ले और आधिकारिक प्रसारण घोषणा देखनी चाहिए।

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पढ़ने के लिए धन्यवाद।

उन लोगों के लिए जो केवल रोमांच के लिए नहीं खेलते।

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क्रिकेट प्रेमी · The High-Stakes Editorial · No. 01

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